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वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र शाह की सड़क हादसे में मौत

Monday 20 February 2012 0 comments

आउटलुक हिंदी के एसोसिएट एडिटर रविंद्र शाह की सिहोर के पास सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। हादसे दो लोग घायल हो गए इनमें मध्यप्रदेश खनिज बोर्ड के उपाध्यक्ष गोविंद मारू और उनका ड्राइवर शामिल है। शाह सोमवार दोपहर इंदौर से भोपाल आ रहे थे। सीहोर से पहले हाइवे पर कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। शाह की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मारू और ड्राइवर को गंभीर चोट आई हैं। इन्हें तुरंत भोपाल भेज दिया गया है। Read the full story

वाह रे शिव का राज, एक्टिविस्ट से लेकर पत्रकार तक को मिल रही है मौत

0 comments

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में सरेआम एक पत्रकार को उसके पूरे परिवार के साथ मौत के घाट उतार दिया जाता है। मुख्यमंत्री हरकत में आते हैं। पुलिस सक्रिय होती है लेकिन हाथ कुछ भी नहीं आता है। दूसरी ओर, राज्य गृहमंत्री इस हत्याकांड को जरा सी बात कह रहे हैं।

उमरिया के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रिका राय बरसों से खनन माफिया के निशाने पर थे। उनकी कलम से कई माफिया की तिजोरियां खाली हो चुकी थी और कईंयों की होने वाली थी। अवैध कोयला खनन को लेकर कई रिपरेटों ने न सिर्फ खनन माफियाओं को मुश्किल में डाला था, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ सरकार भी कई बार मुसीबत में फंस चुकी थी। सबसे अधिक प्रभावित भाजपा के स्थानीय नेता हुए थे। १७ फरवरी को उमरिया में चंद्रिका को उनके घर में ही घुस उनकी पत्नी और दो बच्चों के साथ बड़ी बेदर्दी के साथ मौत की आगोश में पहुंचा दिया गया।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जिसने भी व्यवस्था, भष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का आवाज की, उसे मौत के घाट के उतार दिया। पिछले साल अगस्त में आरटीआई एक्टिविस्ट शेहला मसूद को उनके घर के सामने ही गोली मार दी है। महीनों बीत गए लेकिन आज तक हत्यारा पुलिस की पकड़ से बाहर है। मामला सीबीआई के पास है।

पूरे देश में सबसे शांत प्रदेश का खिताब पा चुके मध्य प्रदेश ऊपर से भले ही भला शांत दिखता हो लेकिन सतह के अंदर की सच्चई कुछ और है। पूरे प्रदेश के पत्रकारों में चंद्रिका राय हत्याकांड के बाद से ही रोष है। स्थानीय पत्रकार जिले के पूरे पुलिस अमले को बदलने की मांग कर रहे हैं। पत्रकार संघ ने चंद्रिका राय की हत्या की जांच के लिए गृहमंत्री उमा शंकर गुप्ता से सीबीआई की मांग की तो गुप्ता का कहना है कि जरां सी बात पर आज कल सीबीआई जांच की मांग होने लगी है, जो ठीक नहीं है।

वाह रे प्रदेश के संवदेनशील गृहमंत्री। यदि यही घटना किसी भाजपा के नेता के साथ होती तो क्या गुप्ता को यह जरा सी बात लगती है।
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dainikbhaskar.com की जयपुर लोकल के लिए खास वेबसाइट लॉन्‍च

Tuesday 14 February 2012 0 comments

दैनिकभास्‍कर.कॉम ने इस वैलेंटाइन डे पर अपने पाठकों को खास तोहफा दिया है। अपनी तरह की अनूठी पहल करते हुए जयपुर के लिए खास वेबसाइट लॉन्च की गई है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के हाथों यह वेबसाइट लॉन्‍च की गई है।


दैनिकभास्कर डॉट कॉम पर 24 घंटे लाइव न्यूज, वीडियो-फोटो के साथ ही सिनेमाहॉल, रेस्तरां, घूमने और शापिंग की गाइड से लेकर अस्पताल-एंबुलेंस, टैक्सी जैसे हर जरूरी नंबर की डायरेक्टरी बस एक क्लिक पर उपलब्‍ध है।


भास्कर की वेबसाइट जयपुर जानने वालों के लिए नया अनुभव लेकर आई है। दैनिक भास्कर में छपने वाली खबरें तो आप यहां पाएंगे ही, शहर की प्रमुख घटनाओं और आयोजनों के वीडियो और तस्वीरें भी देख सकते हैं।


शहर की हर छोटी-बड़ी घटना का अलर्ट मिनटों में वेबसाइट पर देख सकते हैं। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी ने सोमवार को नई दिल्ली में टैबलेट पर क्लिक कर जयपुर हायपर लोकल सिटी सेक्शन का शुभारंभ किया।भारत में किसी शहर को लेकर समाचार वेबसाइट बनाने की यह पहली गंभीर पहल है, जो दैनिक भास्कर बाकी शहरों में भी जल्द शुरू करेगा।



इस खास वेबसाइट पर किसी भी इवेंट का कवरेज होगा ‘रियल टाइम’ आधार पर। यानी जैसे ही शहर में कोई घटना घटेगी कुछ ही मिनटों में दैनिकभास्कर डॉट कॉम पर उसका अलर्ट आपको दिखेगा। वेबसाइट पर शहर के बारे में हर जरूरी जानकारी, मसलन जरूरी फोन नंबर और आज के कार्यक्रम भी उपलब्ध है।


सिटी डायरेक्टरी, हैंगआउट और फूड सेक्शन में इसके अलावा कहां घूमने जाएं और क्या खाएं जैसे प्रश्नों का जवाब होगा।


क्या होगा नए सेक्शन्स में-



सिटी लाइव: इसमें होंगी वो तमाम छोटी खबरें जो अखबार के पन्नों या बड़ी खबरों में जगह नहीं बना पातीं। इन खबरों के पल-पल के अपडेट शहर में फैले हमारे रिपोर्टर्स बताएंगे।


वीडियो : वेब न्यूज की दुनिया में पहली बार हो रहे इस प्रयोग में हमारे रिपोर्टर्स शहर की हर अहम खबर का वीडियो भी लाएंगे, सिर्फ आपके लिए।


साथ ही सिटी डायरेक्टरी, बेस्ट ऑफ सिटी, इवेंट कैलेंडर और फोटो गैलरी जैसे सेगमेंट आपकी रुचि के अनुसार कंटेंट उपलब्ध करवाएंगे। अस्पताल, एंबुलेंस, टैक्सी सर्विस, सिनेमा हॉल, पुलिस स्टेशन, हेल्पलाइन जैसी कई कैटेगरी हैं जहां आपको जरूरत के टेलीफोन नंबर मिलेंगे।


बेस्ट ऑफ सिटी में होंगी शहर के मॉन्यूमेंट्स, रेस्तरां की जरूरी जानकारियां। इन्हें आप इच्छानुसार स्टार्स देकर अपनी रेटिंग भी दे सकते हैं। सिटी ब्लॉगर में शहर से जुड़े विभिन्न विषयों पर होंगे कुछ खास लोगों के ब्लॉग। आप भी यहां अपने विचार शेयर कर सकते हैं।

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पथराई निगाहों से अपनों का इंतजार करती एक हवेली...

Thursday 9 February 2012 0 comments

ठूंठ-सी खड़ी, पथराई निगाहों से अपनों का इंतजार करती एक हवेली..। धूल से लथपथ हो रहे एक बस स्टेशन के पास की हवेली..। गाड़ियां आतीं, सवारियां उतारतीं और गुजर जातीं। हवा का हर झोंका इस हवेली को वो शाम याद दिलाता है.. बरसों से अकेली हवेली का मन उस दिन गाने को हो रहा था..। खुशियां हमेशा उदासी के आने का संकेत होती हैं ..हवेली शायद उस दिन शिद्दत से समझ गई थी.. वरना गए तो वहां से कई हैं..लेकिन वह इस बार ही क्यों रोई..?


उस पुरानी हवेली को देखने की इच्छा ने मुझे एक बार फिर राजस्थान पहुंचा दिया। जयपुर रेलवे स्टेशन से बाहर निकला तो पूरा शहर अलसाई सुबह से जाग ही रहा था। स्टेशन के सामने की चाय की दुकानों पर मेरे जैसे सैकड़ों यात्रियों का जमघट था। मुझे यहां से झुंझनू निकलना था। पांच घंटे के सफर के बाद मैं झुंझनू के बस स्टैंड पर था। इससे पहले भी कई बार इस शहर में आना हुआ। ऑटो लिया। भीड़भाड़ वाले बाजार में ऑटो ने उतारा तो बाजार में घूमते हुए मैं बार-बार आसपास खड़ी खूबसूरत हवेलियों की दीवारों को ही निहार रहा था। एक हवेली में घुसते ही उत्साह चरम पर था। खूबसूरत नक्काशी और पेंटिंग पहली ही नजर में आपको मंत्रमुग्ध कर सकती हैं। लकड़ी के बड़े से फाटक को पार किया तो सामने एक विशाल बरामदा हमारा इंतजार कर रहा था। मोदियों की हवेली में घुसते ही पूरा अतीत आपकी आंखों के सामने होता है। लेकिन यह आप तभी समझ सकते हैं, जब इन हवेलियों से आपका कोई रिश्ता हो।


हम भविष्य की चाह में वर्तमान में पहुंच गए हों, लेकिन ये हवेलियां आज भी अपने खूबसूरत अतीत में ही ठहरी हैं। यहां पहुंचने पर अतीत-वर्तमान में भेद करना आसान हो जाता है। लेकिन एक बात तो तय है कि यहां आकर आप अपने अतीत पर नाज कर सकते हैं। अपने पूर्वजों का तहेदिल से आभार व्यक्त करने का मौका ये बूढ़ी हवेलियां आपको देती हैं।

झुंझनू से एक घंटे के सफर के बाद मैं अपने पुरखों की जमीन पर था। लोगों से पूछते हुए मैं अपनी पुश्तैनी हवेली तक पहुंच चुका था। सैकड़ों कमरे वाली इस हवेली के अधिकांश कमरे ढह चुके थे और जो बचे थे, उस पर कब्जे हो चुके थे। जर्जर, पर बड़ी शान से खड़ी इस हवेली को देखकर अजीब-सा अहसास हुआ। परदादियों की हवेली खुश थी। बरसों बाद कोई अपना उसे देखने आया था। रात के अंधेरे में यह हवेली मुस्करा रही थी। अंदर घुसते ही सामने एक विशाल बरामदा। जिधर भी नजर घुमाओ, बंद कमरे। छतों पर मोरों का जमावड़ा। दीवारों को छुआ तो शरीर में सिहरन दौड़ गई। चांदनी रोशनी में नहाई हवेली रहस्यमयी लग रही थी। दिमाग में बस यही घूम रहा था कि मेरे जैसे कितने लोग अपनी जड़ों से दूर बैठे हैं।

हमारे दादा के दादा सूरजगढ़ से थे। हर मारवाड़ी की तरह वे पूर्व दिशा की ओर बढ़े। धीरे-धीरे सूरजगढ़ सिर्फ पुश्तैनी गांव ही बनकर रह गया। सिर्फ हवेलियों की तस्वीरें निहारने से आपको ये नहीं अपनाएंगी। इसके लिए आपको इन हवेलियों की दीवारों, झरोखों से बात करनी होगी। यकीन मानिए, ये आपको अपना लेंगी। राजस्थान में सैकड़ों ऐसी हवेलियां हैं, जो दर्द से कराह रही हैं। उन्हें बस अपनी उस युवा पीढ़ी का इंतजार है, जिन्होंने कभी अपनी बूढ़ी हवेलियों का ख्याल नहीं किया। हर बूढ़ी आंखों की तरह यह हवेलियां भी बाट जोह रही हैं अपनों का। बस इस ख्वाब के साथ कि कोई अपना आएगा और इन जर्जर दीवारों को फिर से खड़ा करवाएगा।


क्या ऐसा कभी होगा? या फिर अपने अतीत के साथ यह हवेलियां भविष्य की गोद में हमेशा हमेशा के लिए सो जाएंगी। सैकड़ों की तादाद में ऐसी हवेलियां भी हैं, जो शायद अगली बारिश भी न देख पाएं। हर दिन ये दीवारें ढह रही हैं। कभी रेतीली हवाएं तो कभी बारिश के कारण बूढ़ी और कमजोर हवेलियां हर रोज दम तोड़ रही हैं।


9/2/2012, दैनिक भास्कर

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बाघों की दुनिया

बाघों की दुनिया
बाघों की दुनिया की सच्चाई से यदि आप होना चाहते हैं रूबरू तो यहां आपका स्वागत है। दुनिया के सबसे खूबसूरत जानवर का अस्तिव खतरे में है। आइए हम सब मिलकर इसे बचाएं।

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Ashish Maharishi

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आशीष महर्षि
Delhi, Delhi, India
एकला चलो रे की तर्ज पर चला जा रहा हूं। जिंदगी में कई दोस्त आए और लगातार आए ही जा रहे हैं। दोस्ती और दुश्मनों, सफलता और असफलता की परिभाषाओं से ऊपर उठ चुका हूं। आस्तिक हूं, यह बात बस पता है। भोले की नगरी में पैदाइश है, साथ में मन बड़ा चंचल तो गले में रूदाक्ष की माला पहनता हूं। सुना है कि इससे मन शांत रहता हूं। खुद को सभ्य समाज में व्यवस्थित करने का प्रयास करते हुए खुद के काम कर रहा हूं। राम, कृष्णा के प्रदेश यानि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्म। भोले की नगरी में बचपन बिता। घाट-घाट का पानी पीया। बचपन बनारस और आजमगढ़ में बीता। स्कूली ज्ञान भी इन्हीं दोनों शहरों से प्राप्त किया। बाद में राजस्थान के अलवर और जयपुर का रूख किया। कॉलेज की मस्ती तो नहीं, हां पढ़ाई यहां की। फिर जिंदगी के सफर में भोपाल के लिए रुख किया। यूनिवसिर्टी में पढ़ाई कम मस्ती अधिक की। जब भी अवसाद से घिरता हुआ तो कहानी, कविता और ब्लॉग लिखने बैठ जाता हूं। यकीन मानिए मेरी जिंदगी ही एक कविता है। जितना गुनगुनाएंगे, उतना ही समझते जाएंगे मुझे।
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