skip to main | skip to sidebar
Bolhalla
  • Home
  • About Me
    • My Blog
    • e-mail
    • Contact me
  • Subscribe
    • Posts
    • Comments
  • Contact
  • Links
आउटलुक », आशीष महर्षि », गोपालगढ़ », राजस्थान »

राजस्थान के मुख्यमंत्री अपनों के ही कठघरे में

Thursday 29 September 2011 Leave a Comment

आशीष महर्षि जयपुर से

धोरों की धरती राजस्थान में इस बार रेतीला नहीं बल्कि राजनीतिक भंवडर मचा हुआ है। जिसकी सीधी चपेट में खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं। गहलोत व्यक्तिगत तौर पर भले ही साफ छवि वाले हों लेकिन उनके मंत्रिमंडल, विधायक और प्रशासन की कारगुजारी के कारण पूरी सरकार के सामने संकट आ खड़ा हुआ। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान को सबसे चिंता उन राज्यों की है जहां चुनावी बिसात बिछने वाली है। ऐसे में यदि राज्य के किसी बड़े नेता पर गाज गिरे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। क्योंकि कांग्रेस अपने वोट बैंक को बचाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा सकती है। ऐसे में यह महीना प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए काफी कष्टदायी साबित होने वाला है।

ताजा मामला जोधपुर की लापता एएनएम भंवरी देवी और भरतपुर में पुलिस फायरिंग में एक खास समुदाय के लोगों के मारे जाने का है। इतना ही नहीं, आलाकमान से मिल रहे संकेत भी गहलोत के माथे पर बल लाने के लिए काफी है। इन दोनों मामलों ने न सिर्फ राज्य सरकार की बल्कि कांग्रेस की भी बुरी गत कर दी है। दिल्ली से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उसे इस बात की भी संभावना बन रही है कि जल्दी ही प्रदेश से गहलोत की विदाई हो सकती है। हालांकि यह मात्र संभावना ही है। जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा और गृहमंत्री शांति धारीवाल की कार्यप्रणाली को लेकर आलाकमान ने अपनी नाराजगी पहले ेही जता दी है। गहलोत की कुर्सी पर भले ही कोई आंच न आए लेकिन इन मंत्रियों की कुर्सी चली जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। मदेरणा और गहलोत में पहले से ही छत्तीस का आंकडा है। वर्ष 1988 जब कांग्रेस विधानसभा चुनाव लड रही थी तो मदेरणा के पिता पारसनाथ मदेरणा के नेतृत्व में पूरा चुनाव लडा गया लेकिन विधानसभा में अधिक सीट से उत्साहित आलाकमान ने गहलोत को मुख्यमंत्री के रूप में राजस्थान की कमान सौंप दी। बस इसी बात से मदेरणा गहलोत से खफा हैं।

पहले बात जोधपुर में रहस्मयी ढंग से गायब हुई एएनएम भंवरी देवी की। भंवरी को गायब हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं लेकिन आज तक सरकार उसका पता नहीं लगा पाई है। अपनी बीबी की तलाश में भटक रहे अमरचंद्र ने तो सीधा राज्य के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा पर यह आरोप लगा कर पहले ही सनसनी फैला चुका है कि मदेरणा ने ही उसकी पत्नी भंवरी देवी को अपहरण, दुष्कर्म व हत्या करवाई है। जोधपुर के बोरूंदा में नियुक्त हाई प्रोफाइल एएनएम भंवरी देवी को अब तक राजस्थान की सरकार नहीं खोज पाई है। भंवरी उस वक्त सबसे अधिक चर्चा में आई थी, जब उसने दावा किया था कि उसके पास एक कैबिनेट मंत्री की ऐसी सीडी मौजूद है जो राजनीति में में भंवर ला सकता है । मीडिया में आ रही तस्वीरें ने भी भंवरी और मंत्री की बीच नजदीकियों को खोल कर सामने रख दिया है

इसी तरह भरतपुर के गोविंदगढ गांव में 14 सितंबर को पुलिस की गोलियां का निशाना बने मेव समुदाय के लोगों की नौ मौंतों ने भी सरकार को मुसीबत में डाल दिया है। राजनैतिक दलों से लेकर मानवाधिकार संगठनों ने इसके लिए सरकार और पुलिस को ही दोषी माना है। मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की रिपोर्ट के अनुसार तो पुलिस का सांप्रदायिकरण ही इन मौते के लिए जिम्मेदार है।

पीयूसीएल राजस्थान के अध्यक्ष प्रेम कृष्ण शर्मा कहते हैं कि चलिए एक बार मान भी लेते हैं कि पुलिस ने एक विशेष समुदाय के लोगों को जानबूझ कर निशाना नहीं बनाया लेकिन यह कैसे हो सकता है कि पुलिस की गोली से केवल एक ही समुदाय के लोग मारे जाएं। पीयूसीएल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया है कि गोविंदगढ का माहौल बिगाडने और दंगा फैलाने में राष्टीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल जैसे भगवा संगठनों के नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पीयूसीएल की ओर से गोपालगढ़ भेजी गई जांच दल की सदस्य और संगठन की महासचिव कविता श्रीवास्तव कहती हैं कि हमारी चिंता इस बात को लेकर सबसे अधिक है कि किस प्रकार पुलिस ने दो लोगों के आपसी विवाद में भाग लेते हुए एक खास समुदाय को निशाना बनाया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि पुलिस ने सही कदम उठाते हुए गोलीबारी की है, तो यह एक पहेली है कि मरने वाले सभी एक ही समुदाय के कैसे हो सकते हैं। प्रत्यक्षदशियों के आरोप हैं कि इस घटना के पीछे स्थानीय पुलिस करे अलावा गुर्जर नेता, और आरएसएस, बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। आरोप यह लगाया कि ये लोग घटना से पहले थाने में थे, जहां दोनों समुदाय के बीच समझौते के लिए बैठक चल रही थी तथा इन्हीं लोगों ने दबाव बनाकर कलेक्टर से फायरिंग के आदेश लिखवाए। इसकी भी जांच करवाए जाने की आवश्यकता है।

लेकिन भाजपा ऐसे किसी भी आरोप से सहमत नहीं है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी कहते हैं कि यह आरोप बेबुनियाद है। स्थानीय प्रषासन पहल पर ही भाजपा के नेताओं ने स्थानीय विधायक जाहिदा हिना के साथ वहां मौजूद थे। राजस्थान पीयूसीएल के अध्यध्क्ष प्रेम कृष्ण शर्मा का कहते हैं कि यदि समय रहते प्रशासन गंभीरता दि खाते हुए हजारों की भीड़ पर काबू करने की कोशिश करता तो बेगुनाहों की जान नहीं जाती। लेकिन पुलिस ने भीड़ को बढने दिया। ऐसा ही आरोप भाजपा और कांग्रेस लगा रही है जो कि पूरी सरकार के लिए चिंता का सबब है।


कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान कहते हैं कि गोपालगढ़ की घटना में पुलिस प्रशासन की कमियां जरूर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन पहले से सचेत होता तो इस घटना को टाला जा सकता था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि पुलिस और प्रशासन के स्तर पर कोई कमी नहीं रही, कमियां जरूर रही हैं। लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री और सरकार पर दोष मंडना सही नहीं है। भाजपा दवारा मुख्यमंत्री के इस्तीफे पर चंद्रभान कहते हैं कि सौ लोगों को अपने षासनकल में मारे वाली भाजपा किस मुंह से इस्तीफा मांग रही है।

दूसरी ओर, कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी की ओर से भेजी गई कांग्रेस सांसदों की टीम ने भी गहलोत सरकार के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद के अंदर जिस प्रकार अंधाधुंध गोलीबारी की गई है, उसके लिए स्थानीय पुलिस ही जिम्मेदार है । इस रिपोर्ट के बाद गहलोत सरकार को जवाब देना भारी पड सकता है । गहलोत सरकार ने मामले को बढता देखकर आनन फानन में दोनों केस को सीबीआई के हवाले कर विपक्ष की बोलती बंद करने की कोशिश की लेकिन विपक्ष खामोश रहने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री की स्थिति अभी कुछ इस तरह हो गई है कि यदि वह कुछ करते हैं तो नुकसान और नहीं करते हैं तो नुकसान। कांग्रेस का परंपरागत वोट रहे मेव और दलितों के साथ जिस तरह से प्रदेश में अत्याचार हो रहे हैं, उस पर मुख्यमंत्री की चुपी चौंकाने वाली है। दूसरी ओर, दलित नर्स भंवरी देवी की तलाश को लेकर जोधपुर समेत पूरे इलाके में आए दिन धरने प्रदर्शन हो रहे हैं जो कि कहीं न कहीं सरकार के लिए चिंता का सबब हैं।

जमाते इस्लामी संगठन के मोहम्मद सलीम इंजीनियर गहलोत पर निशाना साधता हुए कहते हैं कि इनके राज में न तो अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं न दलित। ऐसे में गृहमंत्री का असंवेदनशील रवैया और तकलीफ पहुंचाता है। कांग्रेस नेतृत्व को इन दोनों को तुरंत हटाकर नए लोगों को सत्ता सौंपनी चाहिए। लेकिन सलीम को कांग्रेस से फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है । वे कहते हैं कि यदि कांग्रेस जाती है तो भाजपा आएगी, जो कि और अधिक नुकसान है। जनता को तीसरे विकल्प की तलाश है । जिस दिन यह मिल गया, उस दिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने हम हाथ जोड लेंगे।

लेकिन राज्य के आला अधिकारी सरकार का बचाव करते हैं। ऐसे ही एक अधिकारी हैं गृह सचिव पीके देब। देब कहते हैं कि इतने बड़े देश में कुछ न कुछ होता ही रहता है । राजस्थान में पिछले छह महीने से कोई बड़ी घटना नहीं हुई। ऐसे में यह कहना है कि घटनाओं को रोक नहीं पा रहा है तो यह बिल्कुल गलत है । हर केस में हमने तत्परता दिखाई और नतीजे आ रहे हैं।

उधर, पूरे मामले पर भाजपा भी खामोश बैठने वाली नहीं है। राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी अपना गुस्सा कुछ यूं बयां करते हैं..हमारे माननीय मुख्यमंत्री के पास विजन के साथ नेतृत्व की कमी है । मुख्यमंत्री की न तो अपने मंत्रियों पर कोई लगाम है और न अधिकारियों पर। यदि भंवरी देवी कांड में फंसे मंत्री इतने ही दूध के धुले हैं तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दें और जब जांच में वह बरी हो जाते हैं तो फिर से कुर्सी पर बैठ जाएं।

भाजपा मुख्यमंत्री के परिवार पर भी हमले करने से नहीं बचती है। अपने परिवारवालों को फायदा पहुंचाना का आरोप झेल रहे अशोक गहलोत को लेकर भाजपा की यही मांग है कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले की जांच करवाएं। चूंकि वह खामोश हैं, इसलिए दाल में कुछ काला नजर आता है। उधर, जब आउटलुक ने कांग्रेस और सरकार का पक्ष जानने की कोषिष की तो कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था। गृहमंत्री बार बार फोन पर आने से बचते रहे, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान का मोबाइल स्विच ऑफ ही रहा।

गहलोत ने अपने पहले मुख्यमंत्री के कार्यकाल में जो मजबूत धर्मनिरप़ेक्ष छवि का निर्माण किया था, अब उस पर सवाल खडे हो गए हैं। गहलोत ने विहिप के नेता प्रवीण तोगडिया की गिरफतारी पर जो साहस दिखला कर एक मजबूत पैगाम छोडा था कि वह अपने सूबे में किसी को अंशाति नहीं फैलाने दें। अब उनके सामने सबसे बडी चुनौती यह साबित करेंगे कि वह उसी तरह मजबूत हैं और धर्मनिरपेक्ष मुदों के लिए प्रतिबध हैं।

आउटलुक हिंदी में यह रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें - आउटलुक अक्टूबर संस्करण

0 comments »

Post a Comment

Newer Post Older Post Home

बाघों की दुनिया

बाघों की दुनिया
बाघों की दुनिया की सच्चाई से यदि आप होना चाहते हैं रूबरू तो यहां आपका स्वागत है। दुनिया के सबसे खूबसूरत जानवर का अस्तिव खतरे में है। आइए हम सब मिलकर इसे बचाएं।

बोल हल्ला के लेखों को ईमेल पर प्राप्त करने के लिए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें.

Ashish Maharishi

My Photo
आशीष महर्षि
Delhi, Delhi, India
एकला चलो रे की तर्ज पर चला जा रहा हूं। जिंदगी में कई दोस्त आए और लगातार आए ही जा रहे हैं। दोस्ती और दुश्मनों, सफलता और असफलता की परिभाषाओं से ऊपर उठ चुका हूं। आस्तिक हूं, यह बात बस पता है। भोले की नगरी में पैदाइश है, साथ में मन बड़ा चंचल तो गले में रूदाक्ष की माला पहनता हूं। सुना है कि इससे मन शांत रहता हूं। खुद को सभ्य समाज में व्यवस्थित करने का प्रयास करते हुए खुद के काम कर रहा हूं। राम, कृष्णा के प्रदेश यानि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्म। भोले की नगरी में बचपन बिता। घाट-घाट का पानी पीया। बचपन बनारस और आजमगढ़ में बीता। स्कूली ज्ञान भी इन्हीं दोनों शहरों से प्राप्त किया। बाद में राजस्थान के अलवर और जयपुर का रूख किया। कॉलेज की मस्ती तो नहीं, हां पढ़ाई यहां की। फिर जिंदगी के सफर में भोपाल के लिए रुख किया। यूनिवसिर्टी में पढ़ाई कम मस्ती अधिक की। जब भी अवसाद से घिरता हुआ तो कहानी, कविता और ब्लॉग लिखने बैठ जाता हूं। यकीन मानिए मेरी जिंदगी ही एक कविता है। जितना गुनगुनाएंगे, उतना ही समझते जाएंगे मुझे।
View my complete profile

Recent Posts

दूसरी जगह पढ़ें

  • काफिला : क्या चिश्ती पाकिस्तान वापिस जा पाएंगे?
  • प्रतिरोध : उतर रही है अन्ना के आंदोलन की खुमारी
  • प्रतिरोध : जिंदगी की लय छेड़... कहां तुम चले गए?
  • प्रतिरोध : मनु की रासलीला और मीडिया का सेल्फ रेग्युलेशन
  • प्रतिरोध : मिट्टी मांगता बुढ़ापा और हृदयहीन राज्यपाल
  • प्रवक्ता डॉट कॉम : कुछ यूं उतर रही है अन्ना के आंदोलन की खुमारी
  • प्रवक्ता डॉट कॉम : मनु की रासलीला और मीडिया का सेल्फ रेग्युलेशन
  • भड़ास : भस्मासुर बनती सोशल नेटवर्किंग साइट्स!
  • विस्फोट : 'साहब हमें तो उजाड़ दिया, अब शेर तो लाओ'
  • विस्फोट : कुछ यूं उतर गई अन्ना के आंदोलन की खुमारी
  • विस्फोट : खतरे में है परकोटे के भीतर बसा जयपुर
  • विस्फोट : खलील की आजादी में सरकारी खलल
  • विस्फोट : खाने पर सबसे कम खर्च करते हैं मप्र के लोग
  • विस्फोट : पोखर के लिए बहा दी खून की नदी
  • विस्फोट : बड़ी कठिन है डगर गहलोत की
  • विस्फोट : मध्य प्रदेश में कैसे बचेंगे बच्चे?

साक्षात्कार

  • अभिषेक बच्चन के साथ एक मुलाकात
  • अरुंधति राय से आशीष की बातचीत

भड़ास पर पढ़ें

  • गंगा को समर्पित है मोहल्ला अस्सी
  • डॉ. खलील जिंदा जाएंगे या फिर मुर्दा, इंतजार कीजिए वक्त का!
  • भंवरी के भंवर में सब बह गए....
  • राकस्टार, हीर और जार्डन उर्फ जंगली जवानी, देसी दारू और गंध
  • राजस्‍थानी फिल्‍म भोभर ने मचाया तहलका
  • वाह रे शिव का राज, एक्टिविस्ट से लेकर पत्रकार तक को मिल रही है मौत
@ ashish maharishi. Powered by Blogger.

Share It

Followers

पुरानी पोस्‍ट

  • ►  2012 (42)
    • ►  May (10)
      • भास्कर, पत्रिका और जागरण मध्य भारत में आमने-सामने
      • बड़े परदे पर अब नहीं दिखता बिहार...
      • कॉरपोरेट कंपनियों के पे रोल पर खड़ा है भारतीय मीडि...
      • हिंदुस्तानी राष्ट्रपति और एकपक्षीय रिपोर्टिग की मि...
      • letter from Dr. Khaleel Chishty
      • सोरी सोनी को न्याय दिलाने के लिए वृंदा आईं आगे
      • विवादों की पाठशाला : माखनलाल पत्रकारिता विवि की नि...
      • हिंदुस्‍तान के नेता कुछ अधिक ही मर्द हो गए हैं!
      • 'मंटो तेरी सोच ते पहरा देआंगे ठोक के'
      • Dr. Chishty's Family sends Press Release
    • ►  April (13)
      • रामदेव-अन्‍ना की जुगलबंदी और टीम अन्‍ना के बिखराव ...
      • ‘जोहरा सहगल : फैटी’
      • दिलीप मंडल जी कहां गया आपका दलित उभार
      • कुछ यूं उतर रही है अन्ना के आंदोलन की खुमारी
      • ''देश को बनाने वाला नहीं, तोड़ने वाला है टीम अन्ना...
      • मनु की रासलीला और मीडिया
      • अब निर्मल बाबा की कृपा नहीं राधे माँ का आशीर्वाद म...
      • एक फैसला जो बदल देगा देश की तस्वीर
      • निंदक नियरे राखिये चाटुकार राखिये दूर
      • प्रकाश झा विवादों में
      • एक पाकिस्तानी होने की सजा मिल रही है डॉक्टर खलील च...
      • बम से नहीं कविता से डर लगता है साब!
      • गंगा को समर्पित है फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’
    • ►  March (14)
      • रणथंभौर के राजा
      • अखबार की जगह स्मार्टफोन पर पढ़ी जाती हैं खबरें
      • शहनाई के सुर, बिस्मिल्लाह और बनारस..
      • धीमी मौत
      • युवा अखिलेश की सरकार में सात दागी मंत्री, अधिकांश ...
      • मीडिया के लिए दिशा निर्देश तय हों -कपाडिय़ा
      • महाराष्ट्र में सबसे अधिक अवैध खनन, मप्र तीसरे नंबर...
      • छि: आप लोग बड़े विकासद्रोही हो.
      • करिश्मे खत्म, संघर्ष शुरू
      • अभिषेक बच्चन के साथ एक मुलाकात
      • गूगल से डर तो लगता है !
      • सियासत ने बनाया आजमगढ़ को 'आतंक की नर्सरी'
      • शेहला हत्याकांड : जाहिदा के दोस्तों में विधायक, मं...
      • 19 बरस पहले भी एक भंवरी के साथ हुआ था गैंग रेप, आज...
    • ►  February (4)
      • वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र शाह की सड़क हादसे में मौत
      • वाह रे शिव का राज, एक्टिविस्ट से लेकर पत्रकार तक क...
      • dainikbhaskar.com की जयपुर लोकल के लिए खास वेबसाइट...
      • पथराई निगाहों से अपनों का इंतजार करती एक हवेली...
    • ►  January (1)
      • बेघर सर्दी की सर्द रातों में ठिठुरन मरने को मजबूर
  • ▼  2011 (44)
    • ►  November (4)
      • हम जाहिल हैं, आरोप अच्छा है
      • न्यूज चैनल पर १क्क् करोड़ का जुर्माना : काटजू की न...
      • ऐश्वर्या की बिटिया पर न्यूज चैनलों की रहस्यमयी चुप...
      • भंवरी के भंवर में सब बह गए....
    • ►  October (2)
      • जिंदगी की लय को छेड़कर कहां चले गए तुम दोनों?
      • कविता श्रीवास्तव के घर छत्तीसगढ़ पुलिस का छापा
    • ▼  September (11)
      • राजस्थान के मुख्यमंत्री अपनों के ही कठघरे में
      • Gopalgarh Police Firing Incident PUCL Report
      • भरतपुर फायरिंग: भगवा, पुलिस और गुर्जरों का निशाना ...
      • भरतपुर दंगे की आग दिल्ली पहुंची
      • गोपालगढ़ दंगा : मौत के खौफ को देख घर छोड़ भागे कई ...
      • गोपालगढ़ के कुएं उगल रहे हैं लाश!
      • अन्ना का इंडियन मानसून
      • गोपालगढ़ दंगा : भाजपा ने गठित किया जांच दल
      • गोपालगढ़ दंगा : घायलों की सुध ली मुख्यमंत्री ने
      • गोपालगढ़ दंगा : मृतक संख्या बढ़कर हुई 4, तनाव बरकर...
      • अफजल की गुजारिश, मत घसीटो दिल्ली विस्फोट में मेरा ...
    • ►  August (6)
    • ►  July (2)
    • ►  June (5)
    • ►  May (2)
    • ►  April (4)
    • ►  March (5)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (95)
    • ►  December (2)
    • ►  November (16)
    • ►  October (2)
    • ►  September (11)
    • ►  August (4)
    • ►  July (2)
    • ►  June (9)
    • ►  May (16)
    • ►  April (15)
    • ►  March (10)
    • ►  February (2)
    • ►  January (6)
  • ►  2009 (146)
    • ►  December (9)
    • ►  November (11)
    • ►  October (11)
    • ►  September (11)
    • ►  August (11)
    • ►  July (24)
    • ►  June (15)
    • ►  May (13)
    • ►  April (9)
    • ►  March (11)
    • ►  February (10)
    • ►  January (11)
  • ►  2008 (141)
    • ►  December (7)
    • ►  November (1)
    • ►  October (5)
    • ►  September (7)
    • ►  August (2)
    • ►  July (4)
    • ►  June (5)
    • ►  May (3)
    • ►  April (14)
    • ►  March (33)
    • ►  February (30)
    • ►  January (30)
  • ►  2007 (51)
    • ►  December (16)
    • ►  November (15)
    • ►  October (7)
    • ►  September (13)

Rajdeep Sardesai

Rajdeep Sardesai

Pratirodh

Pratirodh

अजित वडनेरकर

अजित वडनेरकर

गीत चतुर्वेदी

गीत चतुर्वेदी

अनुज खरे

अनुज खरे

रवीश कुमार

रवीश कुमार

Blogroll

  • दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में बोल हल्‍ला
  • दैनिक हिंदुस्‍तान की संपादकीय पर बोल हल्‍ला का एक और जिक्र
  • बोल हल्ला जैसे कई ब्लॉग पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण
  • interview with Bol Halla
  • " आशीष महर्षि" बोले, बनाबा दो अब योग !!
  • अनूठी पत्रकारिता.. media people blogging

Blogroll

  • दैनिक भास्कर
  • नवभारत टाइम्स
  • न्यूयार्क टाइम्स
  • बीबीसी हिंदी
  • हफिंटन पोस्ट

विज्ञापन

विज्ञापन

Recent Posts

Loading...

Blogging Barracks

Loading...

Most Viewed

Arthemia theme by Michael Jubel | Converted by Rajeel For LabofSkins Tested by Blogger Templates | Best Credit Cards