Friday 19 March 2010

मोहल्‍ला ने मां दुर्गा को नंगा दिखाया, अब आप क्‍या कहेंगे

क़ल के विवाद के बाद अब एक और नया विवाद शुरू हो गया है.अभी अभी मोहल्ला लाइव पर नज़र गई तो ये पोस्ट दिख गई। अब आप खुद ही तय करें....


हुसैन पर हल्‍ला मचाने वाले शिवसेनावाद‍ियों का रचना और उसकी प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं होता। वे बस मंगलाचरण के शोर में अपनी गालियां निकालते हैं और सो जाते हैं। अभी एक मित्र ने हमें सुबोध गुप्‍ता के बारे में बताया, जो कलाकार हैं और जिन्‍होंने दुर्गा की नग्‍न मूर्ति बनायी है। 1964 में बिहार के खगौल जिले में जन्‍मे सुबोध गुप्‍ता ने पटना आर्ट कॉलेज से कला की पढ़ाई की। 1990 के बाद से वे लगातार दिल्‍ली में हैं। सुबोध गुप्‍ता की ये मूर्ति बहुत स्‍वाभाविक है और इसमें दुर्गा की शक्ति को उनके अप्रतिम सौंदर्य के साथ जोड़ कर देखा गया है। गनीमत है कि शिवसेनावादियों की नजर उन पर नहीं पड़ी है। पड़ती भी तो वे सुबोध को हिंदू होने का लाभ देते। ऐसा नहीं लगता कि हिंदुओं की दादागीरी का प्रदर्शन करने वाले इस देश में अभिव्‍यक्ति की सारी आजादी केवल इसी कौम के लिए है? खैर, आइए दुर्गा की नग्‍न मूर्ति पर एक नज़र डालें…



15 आपकी राय:

निशांत said...

माँ की सुन्दर प्रतिमा है यह.
इसमें निर्वसनता का दोष नहीं दीखता.

निशांत said...

पोस्ट की हैडिंग बेहूदी है.

Amitraghat said...

"इस प्रतिमा को तो क्या, किसी भी नग्न स्त्री को यदि एकटक निहारेंगे तो वासना तो जागेगी ही नहीं और यदि जागी भी तो कुछ देर बाद स्वयं के ही आँसुओं में धुल जायेगी....यही तो सनातन मानस है....."
प्रणव सक्सैना

amitraghat.blogspot.com

रमेश आहूजा said...

ये तो एक अच्छी प्रतिमा है...

आपने कल हुसैन की मां और बहिन के नाम से जो फोटो लगायीं थी वे भद्दी थीं

इस पोस्ट का शीर्षक अच्छा नहीं है...

Anonymous said...

अविनाश तो चूतिया है साला,

Anonymous said...

जीत देखा तित पाईया गहरे पानी पैठ । जब तुम अपने छोटी बेटी के या छोटा बेटा जो नंगा खुमता होगा
अपने नहाती हुई माँ या कम कपडे़ में अपनी बहन को भी काम वासना के निगाह से देखते हो क्या

Anonymous said...

वाह बेटा पोस्ट का टाइटल ठीक कर लिया

शहनवाज said...

बेनामी लोग ठीक वैसे ही हैं, जैसे अपने बेटे को अपने बाप का नाम नहीं मालूम

संजय बेंगाणी said...

अब आप क्या कहेंगे?


हिट पाने की चाहत.


दुसरों को चिड़ाने में आनन्द आता है, आप भी किसी की भावनाओं को उकसा कर चिड़ा रहें हैं. बस इससे अधिक कुछ नहीं. अब यह शरारत बन्द करो.

कलम में जोर हो तो उन पर लिखो जिन्होने महिलाओं को बच्चा पैदा करने वाली मशीन कहा है. कायर हिन्दुओं को चिड़ाना कहाँ की बहादूरी है?

Anonymous said...

हम कहेंगे कि आप बेहद बदतमीज़ किस्म के इंसान हैं जिन्होंने इस मूर्ति का जो इन्टरप्रिटेशन किया है वह आपकी छिछली मानसिकता को दिखाता है. आपके शब्द चयन में आपकी समझ की कमी, व्यक्तित्व का ओछापन, बिना बात विवाद पैदा करने की चेष्टा, और दिमागी जाहिलियत के दर्शन हो रहे हैं.

आप कुछ कुलीन लोगों में उठना-बैठना करें तो हो सकता है कि इस गर्त से उबर पायें, वरना आप अपनी इस गंदगी में डूबते-उतराते इतने नीचे गिर जायेंगे कि लोग आपके ऊपर थूकने से भी बचेंगे.

आपका शुभाभिलाषी

आशीष said...

सबसे पहले मैं अपने बेनामी भाईयों को यह साफ कर दूं कि न तो मुझे हुसैन की पेटिंग से कोई ऐतराज है और न दुर्गा की इस मूर्ति से। वजह साफ है यह। आप जब कला पर बंधन लगाने का प्रयास करते हैं तो आप कहीं न कहीं संकुचित दायरे में सिमटते जाते हैं। दुर्गा की इस प्रतिमा में आपको अश्‍लीलता दिख सकती है लेकिन मुझे नहीं। लेकिन उन भगवा कच्‍छा पहनने वालों के लिए क्‍या कहेंगे जो हुसैन को गाली देते हैं लेकिन देश में बने हजारों मंदिरों में बनी देवी-देवता की मूर्तियों को पूजते हैं। वहां इन्‍हें अश्‍लीलता नजर नहीं आती है।

Jaishriram said...

जिस इंसान में अपने नाम से कमेंट देने का साहस नहीं हो, उसके बारे में क्‍या बोला जा सकता है। बेनामी साहब पहले अपना परिचय दें फिर भारत माता की बात कीजिएगा।

Anonymous said...

प्रिय मित्र जयराम मेरे साहस का सीमांकन मेरे नाम से न करें. अगर नाम बतला दूंगा तो यह या आप क्या बिगाड़ लेंगे मेरा? इतना दम तो आप में मुझे नहीं दिखता कि आप फौज लेकर चढ़ दौड़ें मुझ पर नाम पता चलते ही.

नाम न बताना मेरी मर्जी पर मुनहसर है. मैं नहीं समझता आपको इस लायक कि अपना परिचय दं क्योंकि इस गलीज़पन से पहचान जोड़ने की (चाहे वो विरोध ही क्यों हो) मेरी इच्छा नहीं.

और ब्लाग लेखक को दुर्गा कि प्रतिमा किस मंदिर में वस्त्रहीन दिखाई दी हो वह बतायें. हिन्दू सिम्ब्लस में फर्क करना सीखिये, काली और दुर्गा में फर्क है.

अगर आपको मां दुर्गा के नग्न चित्रण में या हुसैन के गंदे चित्रों में रस प्राप्त हो रहा है तो यही कहूंगा की आप अपने चरित्र पर काम करें, उसे बेहतर बनाने की सख्त जरुरत है.

क्योंकि कहा भी गया है, अगर चरित्र चला गया तो सब कुछ चला गया.

आप दोनों का शुभेच्छुक

Sunny Verma said...

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Suman said...

nice