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यशवंत व्यास को द्वितीय तिलक जोशी लोकतंत्र सम्मान

Thursday 17 December 2009 6 comments

द्वितीय ‘तिलक जोशी लोकतंत्र सम्मान’ के लिए व्यंग्यकार और लेखक यशवंत व्यास का चयन किया गया है। व्यास भास्कर समूह की मैग्जीन ‘अहा जिंदगी’ के प्रधान संपादक हैं। साहित्य एवं पत्रकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने के उपलक्ष्य में व्यास को पुरस्कार स्वरूप 5001 रुपए नकद, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र एवं शॉल प्रदान किए जाएंगे। उन्हें यह सम्मान मुक्ति संस्था बीकानेर की ओर से 24 दिसंबर को होटल मरुधर हैरिटेज के विनायक सभागार में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। सचिव राजेन्द्र जोशी ने बताया कि द्वितीय स्व. श्री तिलक जोशी स्मृति व्याख्यान माला के अन्तर्गत शाम 4.30 बजे व्यास ‘शब्द का भूलोक व भूमण्डलीकरण’ विषय पर व्याख्यान देंगे। इससे पूर्व व्यास बिहारी पुरस्कार, राष्ट्रीय जर्नलिज्म फेलोशिप आदि सम्मानों से भी सम्मानित हो चुके हैं। Read the full story

पत्रकारों पर हमले रोकने अध्यादेश लाएगी महाराष्ट्र सरकार

Tuesday 15 December 2009 0 comments

महाराष्ट्र सरकार पत्रकारों और समाचार पत्रों के कार्यालय पर हमले की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए शीतकालीन सत्र समाप्त होते ही अध्यादेश जारी करने जा रही है। यह आश्वासन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने सोमवार को विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को दिया। पुणो श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश कुटे और उनके सहयोगी संदीप जगदाले के साथ शनिवार को अनिल शेवलेकर नामक बिल्डर ने मारपीट की थी। इस घटना के विरोध में नागपुर में प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों को शांत करते हुए मुख्यमंत्री ने अध्यादेश लाने की बात कही। Read the full story

फॉलोअप की कोशिश करे मीडिया

Wednesday 9 December 2009 1 comments

स्वयं के जानकारी लेवल को बढ़ाने के साथ उन मुद्दों पर लिखने की कोशिश करनी होगी, जो सोसायटी के हर पार्ट को टच करते हांे। अधिकतर देखा गया है, न्यूज की जानकारी हमारे टारगेट ग्रुप तक नहीं पहुंच पाती है। इसके लिए मीडिया ऑर्गेनाइजेशंस को सोचना होगा। यह कहना है, यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के जर्नलिज्म डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ। संजीव भानावत का। मंगलवार को भट्टारकजी की नसियां में प्रिया संस्था की ओर से राज्यस्तरीय मीडिया वर्कशॉप ऑन रोल ऑफ मीडिया इन स्ट्रैंथनिंग एसी एंड विमन लीडरशिप टॉपिक पर हुई। डॉ. भानावत ने कहा, अभी जो डवलपमेंट कोर्सेज शुरू हैं, उनमें सोशल इश्यूज के घटनाक्रम को भी शामिल किया जाना चाहिए।

हिन्दी मीडिया का रोल खास

अंग्रेजी न्यूजपेपर्स की तुलना में हिन्दी का अधिक प्रभाव है। हिन्दुस्तान टाइम्स के सीनियर कॉपरेरेटिंग एडीटर एंड हैड के।एस। तोमर ने कहा, दिनोंदिन बढ़ रहे हिंसात्मक इश्यूज का विशलेषण कर ही हम सामाजिक उत्थान की बात कर सकते हैं। मीडिया अकेला कुछ नहीं कर सकता, सोशल ऑर्गेनाइजेशंस और गवर्नमेंट को आगे आना होगा। द हिन्दू राजस्थान के स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट सन्नी सिबेस्टियन ने कहा, देश की पहली दलित विमन मेयर अरुणा सिन्हा के निधन पर उन्हें मुख्य पृष्ठ नहीं देना मीडिया के लिए गलत है। इस वर्कशॉप में राज्यभर से 15 विमन ने पार्टिसिपेट किया। इसमें एस.एन. सैनी, रम्भा त्रिपाठी, किशन त्यागी, प्रियंका टल, डॉ. प्रसाद के साथ राज्यभर से आए जर्नलिस्ट ने विचार रखे।

स्टोरी का फॉलोअप नहीं होता

एक स्वच्छ आर्टिकल तैयार करने के लिए स्वच्छ रिपोटिर्ंग जरूरी है। पिछले 10 सालों में मीडिया में करप्शन बढ़ा है। साहित्यकार डॉ। मनोहर प्रभाकर कहते हैं, अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में कम दलित साहित्य हैं। रिपोर्टर्स को अपनी रिपोर्ट का फॉलोअप करते हुए उसके बिन्दुओं को समझना होगा। ग्रासरूट लेवल पर वर्क कर रहे रिपोर्टर्स को संस्थान पहले ट्रेनिंग दे, फिर स्वतंत्र जर्नलिज्म के लिए कहे तभी सोशल इश्यूज के बारे में सही रिपोर्ट आना सम्भव है।

डवलपमेंट इश्यूज पर ध्यान दे मीडिया

लीडरशिप के काबिल लोगों को चाहे वे किसी भी कैटेगरी के हों, उन्हें वहां से चुनावी मैदान में खड़ा करना होगा। दलित अधिकार केन्द्र के पी.एल. मीमरोठ कहते हैं, प्रेस को अपने हितों से दूर होकर भी सोचना होगा। लोगों को आर्थिक सम्पन्नता के साथ ही संविधान का पालन करना जरूरी है। इसके बाद राजस्थान चुनाव आयोग के आर. के. जैन ने कहा, रूरल एरियाज के बीपीएल वोटर्स को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जाएगी। संविधान में वोट डालना अधिकार है। इसे कर्तव्य के रूप में बदलने का प्रयास होना चाहिए।

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ईरान ने विदेशी मीडिया पर लगाया प्रतिबंध

Monday 7 December 2009 2 comments

तेहरान. ईरान की सरकार ने देश में अगले सप्ताह होने वाली छात्रों की रैली को देखते हुए विदेशी मीडिया द्वारा इसकी रिपोटिर्ंग करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ईरान के सांस्कृतिक मंत्रालय ने विदेशी पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भेजे संदेश में कहा गया है कि मीडिया को तेहरान में समाचार हासिल करने के सभी आदेश सात दिसंबर से नौ दिसंबर तक स्थगित रहेंगे। Read the full story

पापराजी पर सख्त हुईं महारानी

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ब्रिटेन की महारानी ने शाही परिवार और उनके नजदीकियों की निजी जिंदगी में घुसपैठ करने वाले पापराजी पर कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। महारानी के इस कड़े रूख को प्रिंस ऑफ वेल्स, राजकुमार विलियम, राजकुमार हैरी और शाही परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों का समर्थन प्राप्त है जो पापराजी की हरकतों को अनाधिकार दखल और अस्वीकार्य मानते हैं।

ब्रिटेन में हर रोज कई घंटे ढेर सारे पापराजी महारानी के नोरफोक एस्टेट के आसपास फोटो की आस में मंडराते हैं। अब तक शाही परिवार इन पापराजी पर आंखें मूंदे हुए था लेकिन शर्त थी कि फोटो सावर्जनिक रास्तों पर ली गईं हों। बकिंघम पैलेस और क्लैरेंस हाउस के करीबी सहयोगियों के अनुसार शाही परिवार अब टेलीलेंस लगाकर निजी फोटो लिए जाने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। Read the full story

पत्रकार विजय वशिष्ठ को पितृशोक

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दैनिक भास्कर जयपुर में समाचार समन्वयक पद पर कार्यरत विजय वशिष्ठ के पिता वैद्य सागरमल शर्मा का रविवार तड़के जयपुर में निधन हो गया। 98 वर्षीय वैद्य शर्मा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव टीबाबसई (झुंझुनूं) में किया गया। उनके निधन पर आयुर्वेद जगत, दैनिक भास्कर परिवार सहित विभिन्न पत्रकारों ने शोक जताया है। वैद्य शर्मा शेखावाटी के प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं संस्कृत के विद्वान थे। वे 1974 में राजकीय सेवा से निवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से जनसेवा की। Read the full story

आईए हम भोपाल नरसंहार का रोना रोएं

Thursday 3 December 2009 1 comments

दुनिया के कुछ शांत और खूबसूरत शहरों में से एक भोपाल इन दिनों एक बार फिर मीडिया में छाया हुआ। वजह आज से पच्चीस साल पहले हुई गैस त्रासदी है। २५ साल पहले नरभक्षी गैस ने एक ही रात में आठ हजार से अधिक लोगों को अपनी आगोश में ले लिया था। इसके बाद यह आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता गया। स्थिति यह है कि आज भी महीने में एक दो मौत इस जहरीली गैस के कारण हो रही है। उस रात जो हुआ, उसके बारे में बहुत बातें हुई, करोड़ों रुपए मुआवजे के मिले। मुआवजा तो मिला लेकिन उसमें अधिकांश वे लोग थे जो वास्तव में गैस पीड़ित थे ही नहीं।

आज दुनिया भर की मीडिया भोपाल में जुटी और भोपाल को न्याय दिलाने के लिए पूरी दुनिया में भोपाल गैस कांड के २५ साल का कवरेज किया। इस उम्मीद के साथ कि अब भोपाल को न्याय मिलेगा। भोपाल के साथ यहां के वाशिंदे भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं लेकिन आज भी न्याय नहीं मिल पाया। सरकार बदली, नेता बदले लेकिन इसे लेकर राजनीति नहीं बदली। सरकार किसी भी दल की हो, उनकी जुबान एक ही। सुनीता नारायण चिल्ला-चिल्ला कर कह रही हैं कि यूनियन काबाईड परिसर के आसपास का पानी जहरीला है लेकिन हमारे मंत्री बाबू लाल गौर कह रहे हैं ना जी यूके परिसर में अब कोई खतरे की बात नहीं। सब ओके है। अब ऐसे बेशर्म मंत्री को कौन समझाए की आप जो बात कह रहे हैं, उसका कोई आधार नहीं। जबकि सुनीता फैक्ट के साथ बोल रही हैं। मंत्री जी को डॉलर दिख रहे हैं लेकिन सुनीता को लोगों की बेबसी दिख रही है।

मेरा भोपाल से सिर्फ पांच साल पुराना ही नाता है लेकिन मैं इस दर्द को महसूस कर सकता हूं जो भोपाल के वाशिंदों के सीने में उठता है। हम हर साल इस त्रासदी को याद कर रो लेते हैं लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे हैं। मैं यह नहीं कहूंगा कि हम बेबस हैं। बेबस हमें बनाया गया, यह भी मैं नहीं कहूंगा लेकिन यह जरूर कहूंगा कि हमारा खून अब खौलना बंद हो चुका है। खून की जगह पानी बह रहा है। इतनी बड़ी त्रासदी होती है और हम आज भी कानूनी प्रक्रिया के चक्कर में पड़े हैं। आखिर हमें जो कानून पर भरोसा जो है। यह अलग बात है कि कानून कभी भी भोपाल नरसंहार के दरिंदों को सजा नहीं दे पाएगा। तो फिर हमारे पास रास्ता क्या है? क्या हम हाथ पर हाथ रख बैठे रहें या फिर कुछ ऐसा करें कि सरकार की चूलें हिल जाएं। कब तक हम सहेंगे। कब तक भोपाल के लोग रोएंगे। कब तक? इसका जवाब है क्या आपके पास। अब वक्त आ गया है कि हम उठ खड़े हों और सरकार के खिलाफ बगावत करें। यदि आप अहिंसा में विश्वास करते हैं तो आपके लिए यहां कोई जगह नहीं है। पच्चीस साल बाद भी हमें न्याय नहीं मिल पाया, ऐसे अहिंसक आंदोलन का क्या अर्थ?

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भास्कर समूह आईपीओ लाएगा

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प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र दैनिक भास्कर की प्रकाशक कंपनी डीबी कॉर्प ने शेयर बाजार में उतरने का फैसला किया है। दैनिक भास्कर, दिव्य भास्कर, डीएनए समेत सात समाचार पत्रों की प्रकाशक कंपनी डीबी कॉर्प जल्दी ही अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ)लाएगी। इसके जरिए कंपनी अपने विकास और विस्तार के लिए पूंजी जुटाने जा रही है।

प्रमुख हिंदी अखबार के रूप में स्थापित दैनिक भास्कर पिछले 50 वर्षे में सफलता के नए आयाम छूता रहा है और नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करता रहा है। यह अखबार अब कई अन्य नए बाजारों में मजबूती के साथ दस्तक देने की तैयारी में है। कंपनी 1।81 करोड़ शेयर जारी करेगी जिसमें से 1।27 करोड़ नए शेयर होंगे। यह पूरा ऑफर कंपनी के आईपीओ के बाद पूंजी का 10 फीसदी होगा। डीबी कॉर्प के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने बताया कि अभी कंपनी ने शेयर के लिए प्राइस बैंड तय नहीं किया है, लेकिन हमने निश्चय किया है कि जो निवेशक शेयर खरीदें उनके लिए यह फायदेमंद रहे।

आईपीओ के जरिये जुटाई जाने वाली पूंजी के उपयोग के सवाल पर अग्रवाल ने बताया कि यह पैसा नए मार्केट में लांचिंग के लिए खर्च किया जाएगा और कुछ पैसा कंपनी के पिछले कर्ज उतारने में इस्तेमाल होगा। डीबी कॉर्प अगले दो सालों में नए बाजारों पर फोकस करने की योजना बना रही है। कंपनी अपने मौजूदा शहरों में और तेजी से विस्तार करेगी और नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाएगी। कंपनी तीन भाषाओं (हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी) में सात समाचार पत्रों, उनके 48 संस्करणों और 128 उप संस्करणों का 11 राज्यों में प्रकाशन करती है। इनमें मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, नई दिल्ली, महाराष्ट्र आदि प्रमुख हैं।

इन स्थानों में दैनिक भास्कर सबसे सफल अखबार के रूप में काबिज है। समूह का गुजराती दैनिक दिव्य भास्कर गुजरात में सबसे सफल गुजराती अखबार है।भास्कर समूह ने कई नए शहरों में विस्तार किया है और वहां लगातार सफलता हासिल की है। इस सफलता के पीछे भास्कर समूह की निष्पक्ष पत्रकारिता और पाठक की जरूरत समझते हुए उसकी चाहत का अखबार निकालना प्रमुख कारण हैं। भास्कर लाखों की तादाद में अपने पाठकों से संवाद करता है। यह संवाद उनकी जरूरतों को समझने के लिए किया जाता है, जो दैनिक भास्कर समूह को पाठकों से जोड़ता है। यही समूह की सफलता का राज भी है। भास्कर की विशाल पाठक संख्या का विश्वास इसी बात से जुड़ा है कि भास्कर निष्पक्ष पत्रकारिता का संवाहक है। भास्कर समूह का माई एफएम रेडियो स्टेशन 17 शहरों में सफलता का परचम फहरा रहा है।

डीबी कॉर्प तेजी के साथ विकास कर रहा देश का ऐसा समाचार पत्र समूह है जिसका मुख्य जुड़ाव आम जनता से है। समूह की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल पाठक वर्ग है। कंपनी ने इस साल अगस्त में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (डीआरएचपी) कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास दाखिल किया था। इसे सेबी की मंजूरी मिल गई है।

साभार : दैनिक भास्कर Read the full story

मीडिया की आय में हर साल इजाफा

Wednesday 2 December 2009 0 comments

देश में मीडिया समूहों को विज्ञापनों से होने वाली कमाई में हर साल इजाफा हो रहा है। अभी प्रिंट मीडिया विज्ञापनों के मामले में टेलीविजन से आगे है, पर टीवी चैनलों की विज्ञापनों से कमाई भी बढती जा रही है। यह जानकारी केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्नी सीएम जातुया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। उन्होंने बताया कि मीडिया ने विज्ञापनों से 2006 में 165 अरब रुपए की कमाई की तो 2007 में 196 अरब 60 करोड़ की कमाई की और 2008 में करीब 221 अरब 60 करोड़ रुपए की कमाई की।

किसने कितना कमाया

इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया : 60 अरब 50 करोड़ (2009)

2007 में 71 अरब 10 करोड़

2008 में 82 अरब 50 करोड़ रुपए

प्रिंट मीडिया : 84 अरब 90 करोड़ (2009)

2007 में 100 अरब 20 करोड़

2008 में 108 अरब 40 करोड़

रेडियो मीडिया : 2006 में 6 अरब*

2007 में 7 अरब 40 करोड़

वेब मीडिया: इंटरनेट को वर्ष 2006 में दो अरब

2007 में तीन अरब 90 करोड़

2008 में करीब 6 अरब 20 करोड़ रुपए

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बाघों की दुनिया

बाघों की दुनिया
बाघों की दुनिया की सच्चाई से यदि आप होना चाहते हैं रूबरू तो यहां आपका स्वागत है। दुनिया के सबसे खूबसूरत जानवर का अस्तिव खतरे में है। आइए हम सब मिलकर इसे बचाएं।

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आशीष महर्षि
Delhi, Delhi, India
एकला चलो रे की तर्ज पर चला जा रहा हूं। जिंदगी में कई दोस्त आए और लगातार आए ही जा रहे हैं। दोस्ती और दुश्मनों, सफलता और असफलता की परिभाषाओं से ऊपर उठ चुका हूं। आस्तिक हूं, यह बात बस पता है। भोले की नगरी में पैदाइश है, साथ में मन बड़ा चंचल तो गले में रूदाक्ष की माला पहनता हूं। सुना है कि इससे मन शांत रहता हूं। खुद को सभ्य समाज में व्यवस्थित करने का प्रयास करते हुए खुद के काम कर रहा हूं। राम, कृष्णा के प्रदेश यानि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्म। भोले की नगरी में बचपन बिता। घाट-घाट का पानी पीया। बचपन बनारस और आजमगढ़ में बीता। स्कूली ज्ञान भी इन्हीं दोनों शहरों से प्राप्त किया। बाद में राजस्थान के अलवर और जयपुर का रूख किया। कॉलेज की मस्ती तो नहीं, हां पढ़ाई यहां की। फिर जिंदगी के सफर में भोपाल के लिए रुख किया। यूनिवसिर्टी में पढ़ाई कम मस्ती अधिक की। जब भी अवसाद से घिरता हुआ तो कहानी, कविता और ब्लॉग लिखने बैठ जाता हूं। यकीन मानिए मेरी जिंदगी ही एक कविता है। जितना गुनगुनाएंगे, उतना ही समझते जाएंगे मुझे।
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