स्वयं के जानकारी लेवल को बढ़ाने के साथ उन मुद्दों पर लिखने की कोशिश करनी होगी, जो सोसायटी के हर पार्ट को टच करते हांे। अधिकतर देखा गया है, न्यूज की जानकारी हमारे टारगेट ग्रुप तक नहीं पहुंच पाती है। इसके लिए मीडिया ऑर्गेनाइजेशंस को सोचना होगा। यह कहना है, यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के जर्नलिज्म डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ। संजीव भानावत का। मंगलवार को भट्टारकजी की नसियां में प्रिया संस्था की ओर से राज्यस्तरीय मीडिया वर्कशॉप ऑन रोल ऑफ मीडिया इन स्ट्रैंथनिंग एसी एंड विमन लीडरशिप टॉपिक पर हुई। डॉ. भानावत ने कहा, अभी जो डवलपमेंट कोर्सेज शुरू हैं, उनमें सोशल इश्यूज के घटनाक्रम को भी शामिल किया जाना चाहिए।
हिन्दी मीडिया का रोल खास
अंग्रेजी न्यूजपेपर्स की तुलना में हिन्दी का अधिक प्रभाव है। हिन्दुस्तान टाइम्स के सीनियर कॉपरेरेटिंग एडीटर एंड हैड के।एस। तोमर ने कहा, दिनोंदिन बढ़ रहे हिंसात्मक इश्यूज का विशलेषण कर ही हम सामाजिक उत्थान की बात कर सकते हैं। मीडिया अकेला कुछ नहीं कर सकता, सोशल ऑर्गेनाइजेशंस और गवर्नमेंट को आगे आना होगा। द हिन्दू राजस्थान के स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट सन्नी सिबेस्टियन ने कहा, देश की पहली दलित विमन मेयर अरुणा सिन्हा के निधन पर उन्हें मुख्य पृष्ठ नहीं देना मीडिया के लिए गलत है। इस वर्कशॉप में राज्यभर से 15 विमन ने पार्टिसिपेट किया। इसमें एस.एन. सैनी, रम्भा त्रिपाठी, किशन त्यागी, प्रियंका टल, डॉ. प्रसाद के साथ राज्यभर से आए जर्नलिस्ट ने विचार रखे।
स्टोरी का फॉलोअप नहीं होता
एक स्वच्छ आर्टिकल तैयार करने के लिए स्वच्छ रिपोटिर्ंग जरूरी है। पिछले 10 सालों में मीडिया में करप्शन बढ़ा है। साहित्यकार डॉ। मनोहर प्रभाकर कहते हैं, अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में कम दलित साहित्य हैं। रिपोर्टर्स को अपनी रिपोर्ट का फॉलोअप करते हुए उसके बिन्दुओं को समझना होगा। ग्रासरूट लेवल पर वर्क कर रहे रिपोर्टर्स को संस्थान पहले ट्रेनिंग दे, फिर स्वतंत्र जर्नलिज्म के लिए कहे तभी सोशल इश्यूज के बारे में सही रिपोर्ट आना सम्भव है।
डवलपमेंट इश्यूज पर ध्यान दे मीडिया
लीडरशिप के काबिल लोगों को चाहे वे किसी भी कैटेगरी के हों, उन्हें वहां से चुनावी मैदान में खड़ा करना होगा। दलित अधिकार केन्द्र के पी.एल. मीमरोठ कहते हैं, प्रेस को अपने हितों से दूर होकर भी सोचना होगा। लोगों को आर्थिक सम्पन्नता के साथ ही संविधान का पालन करना जरूरी है। इसके बाद राजस्थान चुनाव आयोग के आर. के. जैन ने कहा, रूरल एरियाज के बीपीएल वोटर्स को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जाएगी। संविधान में वोट डालना अधिकार है। इसे कर्तव्य के रूप में बदलने का प्रयास होना चाहिए।
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